शासक वर्ग बहुत पहले से जनता को असली मुद्दों से Divert करने के लिए झूठ, फर्जी खबरों व प्रोपेगैंडा का सहारा लेती रही है लेकिन मोदी के सत्ता में आने के बाद से BJP जैसा प्रोपेगैंडा करती है, वो एक अलग लेवल का है; जब तक ये मालूम होता है कि ये सब प्रोपेगैंडा है, तब तक "अनर्थ" हो चुका होता है ... आइए हम इसे तबलीगी जमात मामले से समझने की कोशिश करते है :-

जब 24 मार्च 2020 के शाम को 8 बजे PM मोदी ने बिना किसी तैयारी के रात 12 बजे यानी कि 25 मार्च से पूरे देश मे Lockdown लगाया था और लोगों से कहा था कि जो जहाँ है वही रहे । उस समय निजामुद्दीन मरकज में सरकार के अनुमति से तबलीगी जमात के लोग धार्मिक कार्यक्रम के लिए उपस्थित थे, जो Lockdown लगने के बाद वही उपस्थित रहे, फिर इनमें से जैसे ही कुछ लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए तैसे ही BJP / मीडिया सभी लोग इसे कोरोना जिहाद, मानव बम जैसे शब्दों से पुकारने लगे ।

BJP / मीडिया से ले करके सरकार तक हर स्तर पर तबलीगी जमात के खिलाफ पूरा वातावरण बना दिया गया । तबलीगी जमात से जुड़े एक एक बन्दे को ट्रेस किया गया और इस प्रकार से कुल 1600 - 1700 के करीब ऐसे कोरोना मरीज मिले जिन्हें जमात से सम्बंधित बताया गया । जमात के बहाने पूरे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ इतना वातावरण बनाया गया कि इनके मन में एक दहशत फैल गया था, सम्भवतः इसीलिए कुछ 10-11 लोग अस्पताल से भाग गए और कुछ 14-15 लोग छिप गए; अब क्या था ... मीडिया ने 24 घन्टे इन्हें कोरोना बम, जिहाद आदि बताने में लगा दिए जिससे देश - प्रदेश के जरूरी मुद्दों, प्रवासी मजदूरो, अस्पताल की अव्यवस्था आदि को छिपा करके सरकार को बचाया जा सके । गूगल पर "तबलीगी जमात कोरोना" सर्च कीजिए आपको BJP मीडिया से घृणा हो जाएगा ।

केंद्र सरकार अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तबलीगी जमात से जुड़े केसों को अलग से बताने लगा । फिर दिल्ली की केजरीवाल सरकार व अन्य कई राज्य सरकारों ने भी तबलीगी जमात से जुड़े केसों को अलग से बतानी लगी ।

तबलीगी जमात के लोग इधर उधर थूक रहे है, डॉक्टरों को गंदे गंदे इशारे कर रहे है .. ना जाने कैसे कैसे आरोप लगाए गए । शायद तबलीगी से जुड़े केसों को अधिक दर्शाने के लिए इससे सम्बंध नहीं रखने वाले लोगो के केस को भी तबलीगी से जुड़ा बताया गया ( हालांकि बाद में पता चला कि BJP मीडिया द्वारा लगाए अधिकांश आरोप फर्जी थे, लेकिन यह हकीकत सीमित लोगो को ही पता चला क्योकि सच सामने आने पर अधिकांश मीडिया वालों को सांप सूंघ गया था )

मुझे तो पहले ही लग गया था कि ये सब फर्जी प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है क्योंकि पूंजीवादी मीडिया कोई सुबूत नहीं दे रही थी, केवल कहानी परोस रही थी, केवल सूत्रों का नाम ले के बैकैती कर रही थी । मैंने अपने YouTube Videos , Blogs और Other Sites पर लोगो को आगाह भी किया था कि प्रोपेगेंडा में ना फंसे लेकिन लोग हमारी कहा सुनते । खैर ..

हालांकि जिसदिन लॉक डाउन का निर्देश हुआ तब जो लोग मरकज में बच गए थे, उन्हें निकालने के लिए वाहनों का इंतजाम किया गया था. इन वाहनों की लिस्ट दिल्ली पुलिस को दी गई थी, ताकि वाहन पास मिल पाएं । मरकज की ओर से 25 मार्च को पुलिस-प्रशासन को चिट्ठी लिखी गई थी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया. मतलब कि 23 मार्च को जब 21 दिनों का लॉकडाउन शुरू हुआ तो प्रशासन को इस बात की जानकारी थी कि इस मरकज में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद हो सकते हैं, इसके बावजूद इन्हें निकालने का प्रबंध नहीं किया गया । पुलिस स्टेशन भी मरकज के बिल्डिंग से बिल्कुल सटा हुआ है । मीडिया ने इस खबर को पूरी तरीके से दबा दिया और BJP मीडिया व कुछ सरकारें जमात के नाम पर सभी मुसलमानों को बदनाम करते रहे और सरकार के नाकामियां छिपाते रहे । यह हकीकत, पुलिस / सरकार की नाकामी 31 मार्च को मीडिया के छोटे से वर्ग ने एक छोटे से कोने में बताया, इस पर कोई चर्चा नहीं किया गया, इस पर सरकार / पुलिस से कोई सवाल नहीं पूछा गया ( हालांकि रवीश कुमार जैसे कुछ लोगो ने तब भी सयंम का परिचय दिया था )

तबलीगी जमात में आये देशी - विदेशी लोगो के खिलाफ अनेको जगहों पर FIR किया गया था .. विदेशी जमातियों के पासपोर्ट रद्द कर दिए गए थे ... महीनों तक सरकार के नाकामियों को छिपाने के लिए जमातियों और जमातियों के बहाने पूरे मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया जाता रहा .. कई लोगो ने मुसलमानों से फल सब्जी आदि खरीदना बंद कर दिया था । मीडिया ( मुख्यतः नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ) ने तबलीगी के पक्ष को और RTI द्वारा सामने आ रहे मोदी सरकार के नाकामियों को पूरी तरीके से नजरअंदाज कर दिया । तबलीगी जमात प्रमुख मौलाना साद के खिलाफ गिरफ्तारी का अभियान चलाया गया ।

जो सुप्रीम कोर्ट आधी रात को अर्नब गोस्वामी के लिए खुल गया था, जो सुप्रीम कोर्ट BJP के लोगो के खिलाफ कई जगह FIR पर उन्हें रद्द करने का आदेश दिया, उसी सुप्रीम कोर्ट ने तबलीगी मामले में कई जगह दर्ज FIRs को रद्द करने से मना कर दिया । मतलब कि BJP वालों और दूसरे लोगो के लिए अलग अलग नियम कानून है ?? सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को हाई कोर्ट जाने की छूट दी ... सुप्रीम कोर्ट कैसे BJP सरकार की मदद करता है, इस बारे में आपने बहुत पढ़ा होगा ।

तबलीगी जमात के लोगो ने हाई कोर्ट का रुख किया और महीनों बाद विभिन्न हाई कोर्टों ने तबलीगी जमात से जुड़े सभी FIRs को रद्द कर दिया ।

बाम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात  मामले में देश और विदेश के जमातियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कर दिया है । कोर्ट ने कहा कि इस मामले में तबलीगी जमात को 'बलि का बकरा' बनाया गया। कोर्ट ने साथ ही मीडिया को फटकार लगाते हुए कहा कि इन लोगों को ही संक्रमण का जिम्मेदार बताने का प्रॉपेगेंडा चलाया गया । कोर्ट ने शनिवार ( 22 अगस्त 2020 ) को कहा कि दिल्ली के मरकज में आए विदेशी लोगों के खिलाफ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़ा प्रॉपेगेंडा चलाया गया। ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई, जिसमें भारत में फैले Covid-19 संक्रमण का जिम्मेदार इन विदेशी लोगों को ही बनाने की कोशिश की गई। तबलीगी जमात को बलि का बकरा बनाया गया । हाई कोर्ट बेंच ने कहा, 'भारत में संक्रमण के ताजे आंकड़े दर्शाते हैं कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ ऐसे ऐक्शन नहीं लिए जाने चाहिए थे। विदेशियों के खिलाफ जो ऐक्शन लिया गया, उस पर पश्चाचाताप करने और क्षतिपूर्ति के लिए पॉजिटिव कदम उठाए जाने की जरूरत है।'

मुंबई हाई कोर्ट से पहले मद्रास हाईकोर्ट ने तबलीगी जमात के लोगो के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि (तब्लीगी जमात) विदेशियों ने पर्याप्त कष्ट उठाया, उन्हें जल्द से जल्द अपने देश लौटने का अधिकार ।

तबलीगी जमात में शामिल हुए एक व्यक्ति पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने "हत्या के प्रयास" की धारा लगाई थी, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द करते हुए; UP सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी ।

छत्तीसगढ़, पंजाब व हरियाणा, मद्रास हाईकोर्ट, इलाहाबाद हाईकोर्ट, मुंबई हाई कोर्ट समेत कई हाई कोर्टों और अनेकों अन्य न्यायालयों ने तबलीगी जमात के पक्ष में फैसला सुनाया और सरकार व मीडिया के खिलाफ कई सख्त टिप्पणियां भी की ।

साकेत कोर्ट ( दिल्ली ) के चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने 15 दिसंबर को 36 विदेशी नागरिकों को सभी आरोपों से बरी कर दिया. इससे पहले मुंबई में बांद्रा की एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने भी तबलीगी जमात से जुड़े 20 विदेशी नागरिकों को बरी कर दिया था.

अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से तबलीगी जमात के याचिका पर एफिडेविट दाखिल करने को कहा था जिस पर 8 अक्टूबर 2020 को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जोरदार फटकार लगाते हुए कहा कि सरकार के हलफनामे को 'जवाब देने से बचने वाला' और 'निर्लज्ज' करार दिया. कहा कि याचिकाकर्ताओं ने कुछ टीवी चैनलों पर जो आरोप लगाए थे, उसका इसमें कोई जिक्र नहीं है.

कुल मिलाकर कोरोना / प्रवासी मजदूरों / मंहगाई / दम तोड़ते स्वास्थ्य व्यवस्था आदि पर सरकार को बचाने के लिए तबलीगी जमात को बलि का बकरा बनाया गया ... मौलाना साद आदि को इस तरीके से पेश किया गया, जैसे मानो वो कोई बड़ा खूंखार आतंकवादी हो लेकिन आज क्या हुआ ? निजामुद्दीन मरकज प्रमुख साद कहा है ? आज तक वे कहीं नहीं दिखे ?

सेना, अर्धसैनिक बल, दिल्ली पुलिस, ED, CBI, NCB आदि मोदी सरकार के अधीन है । केंद्र व 28 में से 12 राज्यों में BJP, 5 में NDA व 8 UT में से 6 में डायरेक्ट मोदी सरकार व 1 में NDA की सरकार है { मतलब कि केंद्र के साथ 36 राज्यो/UTs में से 24 में BJP का राज है } सबसे अधिक सांसद BJP के है, सबसे अधिक विधायक है, नीचे से ले के ऊपर तक BJP काबिज है; जैसे पहले कांग्रेस काबिज थी ...

क्या आपने कभी सोचा है कि BJP ही आरोप लगा रही थी और BJP ही सत्ता में है तो फिर अगर साद या किसी ने भी कुछ गलत किया है तो फिर BJP मीडिया व सोशल मीडिया के माध्यम से प्रोपेगैंडा फैलाने के बजाए कानून के हिसाब से कार्यवाही क्यो नहीं करती है ? क्योकि ऐसा कुछ होता ही नहीं है, तबलीगी जमात मामला भी कुछ नहीं था, ये बनाया गया था, जिससे सरकार के नाकामियों को छिपाया जा सके ? आपको पता है कि सरकार व मीडिया दोनों उद्योगपतियों के चन्दों / Ads से चलती है ।

न्यायपालिका ने सब साफ कर दिया कि तबलीगी जमात को बलि का बकरा बनाया गया । तबलीगी जमात से जुड़े सभी लोगो को बरी कर दिया गया । मरकज से सटे हुआ पुलिस थाना है; दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अधीन है .. जैसा BJP सांसद सुभाष चंद्रा के ज़ी न्यूज़ के सुधीर चौधरी ने कहा था कि मरकज में पुलिस के जाने की हिम्मत नहीं होती है, वो भी एक प्रोपेगैंडा था .. और अगर ऐसा होता तो भी ये मोदी सरकार की नाकामी होती ।

न्यायपालिका के फैसलों के बाद भी प्रोपैगैंडा जारी है । अभी हाल में सऊदी अरब ने तबलीगी नाम के दूसरे संगठन पर प्रतिबंध लगाया तो BJP मीडिया ने इसे तबलीगी जमात पर प्रतिबंध बताया तो फिर सऊदी अरब के विदेश मंत्री को स्पष्टीकरण देना पड़ा । वैसे, पहले भी BJP मीडिया का छिछलेदार हुआ है लेकिन इन्हें फर्क कहा पड़ता है । जनता भी आँख बंद करके इन पर विश्वास कर लेती है ।

अब सवाल यह है कि जब तबलीगी जमात निर्दोष था तो फिर उसके खिलाफ इतने व्यापक स्तर पर झूठ क्यो व किसके इशारे पर फैलाया गया ? किसी निर्दोष के खिलाफ इतने बड़े स्तर पर झूठ / प्रोपेगैंडा फैलाने वालों को कोई सजा क्यो नहीं दी गयी ? यह कोई एकलौता मामला थोड़े है, देश में जब भी कुछ होता है तो सरकार को बचाने के लिए नया प्रोपेगैंडा फैला दिया जाता है --

सुशांत सिंह राजपूत के मौत पर कितना प्रोपैगैंडा फैलाया गया था, क्या हुआ ? दिल्ली हिंसा के पीछे कौन था ? अगर कोमल शर्मा निर्दोष है तो छिपी क्यो है और अगर दोषी है तो जेल में क्यो नहीं है ? कन्हैया कुमार ने देशद्रोही नारे लगाए थे तो आज तक कोई कार्यवाही क्यो नहीं हुआ ? आंदोलनकारी किसानों के खिलाफ कैसे मुहिम चलाया गया था । शाहरुख के बेटे आर्यन खान के लिए इतना प्रोपैगैंडा चलाया गया, क्या हुआ ? गुजरात में लाख गुना अधिक प्रतिबंधित ड्रग्स मिला, मीडिया व BJP ने एक शब्द नहीं बोला ...

सवाल बहुत सारे है लेकिन क्या जवाब मिलेगा ? - फर्जी खबर चलाने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाई क्यो नहीं होती है ? जब महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग जैसे संविधानिक संस्थाएं अपनी जिम्मेदारियां भूल चुके है तो फिर NBA जैसी संस्थाओं की स्थिति क्या है, बताने की जरूरत नहीं है । मीडिया से बेरोजगारी, मंहगाई, गरीबी, भुखमरी, रेप जैसे खबर तो कब के गायब हो चुके है ।

कारण सबको पता है, समाधान सबको पता है लेकिन इन सुधारो को लागू कौन करेगा ? - राजनीतिक दल तो इन्हें लागू करने से रहे ... सभी राजनीतिक पार्टियां सत्ता में है । अपना दल, JDU, AIDMK आदि BJP के साथ केंद्र के सत्ता में है ... BJD, YSR C आदि राज्यसभा में BJP की मदद करती रहती है । 28 में से 11 राज्यों व 1 UT में "गैर NDA" सरकार है ... लेकिन कोई कुछ नहीं करता । विधानसभाओं के पास बहुत ताकत है । बाकी आप समझदार है ।

Writer - Bhartendu Vimal Dubey ( Umang )


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