AISSA (All india satrangi salaam association ) ने दिनांक 16 जून 2024 दिन रविवार को एक general meeting बुलाई जो कि एक खुले वातावरण में, शहीद चंद्रशेखर आजाद नामक पार्क मे आयोजित की गयी थी जिसका एक मात्र उद्देश्य अपने समुदाय के लोगों कि राय लेना उनसे घुलना मिलना, कुछ अपनी कुछ उनकी बातों को सुनना और चर्चा करना था जिसमे उम्मीद से भी ज्यादा लोगों ने बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया सबने अपनी अपनी बातें रखी सबको जानने का मौका मिला।
16 जून की मीटिंग में उपस्थित जन
इस मीटिंग में कुछ बातें ऐसी भी हुई जिनका यहाँ जिक्र करना बहुत ही जरुरी हैं,कुछ ऐसी बातें जो उपस्थित लोगों ने सबके सामने रखी उनमें मैं भी था.साथ ही कई सारे सवाल मेरे मन में आये जैसे कि हमारे समुदाय में अपने ही लोग जो भेदभाव करते हैं उनका अंत नहीं हैं क्या?
हमारे देश में हम आजाद होते हुए भी आजाद नहीं हैं, हम आजाद नहीं हैं खुल के जीने के लिये, हम आजाद नहीं हैं अपना मन पसंद जीवन साथी चुनने के लिए, हम आजाद नहीं हैं अपने खुद के घर मे, हमें कब मिलेगी आजादी।
इस सामाज में क्या विषमलिंगी लोगो को ही जीने का हक़ हैं?
दो लोगो के बीच के प्यार का हक़ चाहे वो जो कोई भी हो,पुरुष-स्त्री में ही प्यार हो सकता हैं ये किस जगह पे लिखा हैं मैंने सुना है कि प्यार,लिंग नहीं मन और भाव देखता है। अरे जब ऊपर वाले ने भेद नहीं किया तो समाज क्यूँ कर रहा ये दाखियानूसी बातें क्यूँ रख रहा। आखिर इसका अंत कब होगा
जब कोई ऐसा व्यक्ति जो कि LGBTQIA+ समुदाय का हो और उसको उसके मन की बात उसका किसी अपने को बताने की होती हैं तो पहले उसको हजार बार सोचना पड़ता हैं कि कहीं इसे पता चलने के बाद मेरे लिए इसकी सोच ना बदल जाये कही ये ना समझें और मुँह फेर लें ये सब ख्याल आते हैं और वो व्यक्ति वही अपने कदम पीछे हटा लेता हैं और अपने अंदर चल रहीं बातों को दिल के एक खाली कोने मे रखकर ताला मार लेते हैं और इसी उधेड़ बुन में उसकी सारी जिंदगी बीत जाती हैं वो व्यक्ति अपनी जिंदगी खुलके ना तो जी पाता हैं और ना ही बता पाता है और एक दिन ऐसे ही मिट्टी मे विलीन होकर दुनिया से विदा लें लेता है।
खैर, हजारों सवालात अभी भी मेरे जहन में उमड़ रही हैं जिनका जिक्र कभी और करूँगा। ऐसे ही सवाल जवाब का सिलसिला तो चलता ही रहेगा।आखिर अपने मन कि भड़ास भी तो निकालनी हैं मुझे
मीटिंग में और भी बातें हुई हैं वहाँ का वातावरण में इतना गुम हो चुका था मैं कि कब सवाल जवाब और बातों का सिलसिला खत्म हुआ पता ही नहीं चला और सब अपने अपने गंतव्य को प्रस्थान हुए।
आशा हैं ये लेख आपको पसंद आया होगा। आपसे विदा लेना चाहूंगा अगर कोई त्रुटि हो तो माफ़ी चाहूंगा
धन्यवाद 🙏
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