Reblogged from UNSAID THOUGHTS:

Click to visit the original post

जो लिखने बैठूं तो तुम्हारी जफ़ाओं पे किताबें लिख दूं
पर तुम मेरी जिंदगी की कोई अधूरी नज़्म हो सकते हो, पूरी किताब नहीं।।

💕🌷