मैने सभी चिट्ठियों को
जला कर राख कर दिया है
उनमें से माज़ी की महक आ रही थीं
एक हाड लिफाफो में
चंदन की खुशबू थी
पर उन्हें भेजने से पहले
तुम्हारी
साजिशो पर अंकुश
लग चुका था
तुम अपनी वाणी से
ज़हर का तालाब
उड़ेल रहे थे
***
तुमने मेरे खतों
में लिखी ग्लानि का
पर्दाफाश किया
और मेरी दोस्ती
को सख़्त बताया
तुम्हे हाथों से लिखे खतों का
मोल
कभी ना था
तुम्हे उनमें भरे राज़
का अंदाज़ा नहीं था
***
तुम उनमें हमेशा अपने लिए
एक प्रशंसक के चरित्र
को खोजते रहे
मैं तुम्हे निष्पक्ष
अपने तर्क देता गया
***
अब से कोई असाधारण वार्तालाप
नहीं होंगे
अब से बातों की ऊंच नीच
नही होगी
मैने तुमसे अब दूरी बरत ली है
क्योंकि मुझे चिट्ठी
की जगह
लोभ और वासना
से भरे पर्चे तुमने
भेजे थे
अब उन दस्तावेजों को
अपने पास रखो तुम
वो तुम्हारी अपनी
कहानी बखूबी बताएंगे
***
No comments:
Post a Comment